श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.18.9 
तत्कर्मगुणवीर्याणि काश्यपस्य महात्मन: ।
पश्चाद्वक्ष्यामहेऽदित्यां यथैवावततार ह ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
और फिर (श्रीमद् भागवत के आठवें स्कंध में) मैं यह वर्णन करूँगा कि किस तरह उरुक्रम, भगवान् वामनदेव परम साधु कश्यप के पुत्र के रूप में प्रकट हुए और कैसे उन्होंने तीनों लोकों को अपने पगों से नाप लिया। मैं उनके अपूर्व कर्मों, गुणों, शक्ति तथा अदिति के गर्भ से जन्म ग्रहण करने के सम्बन्ध में भी वर्णन करूँगा।
 
और फिर (श्रीमद् भागवत के आठवें स्कंध में) मैं यह वर्णन करूँगा कि किस तरह उरुक्रम, भगवान् वामनदेव परम साधु कश्यप के पुत्र के रूप में प्रकट हुए और कैसे उन्होंने तीनों लोकों को अपने पगों से नाप लिया। मैं उनके अपूर्व कर्मों, गुणों, शक्ति तथा अदिति के गर्भ से जन्म ग्रहण करने के सम्बन्ध में भी वर्णन करूँगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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