श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 76
 
 
श्लोक  6.18.76 
तदिदं मम दौर्जन्यं बालिशस्य महीयसि ।
क्षन्तुमर्हसि मातस्त्वं दिष्ट्या गर्भो मृतोत्थित: ॥ ७६ ॥
 
 
अनुवाद
हे माता, हे सर्वश्रेष्ठ महिला! मैं मूर्ख हूँ। मैंने जो भी अपराध किए हैं, उसके लिए आप मुझे क्षमा करें। आपके उनचासों पुत्र आपकी भक्ति के कारण ही बिना किसी नुकसान के पैदा हुए हैं। मैंने दुश्मन होने के नाते उन्हें टुकड़े-टुकड़े कर दिया था, लेकिन आपकी महान भक्ति के कारण वे नहीं मरे।
 
O mother, O great lady! I am a fool. Please forgive me for all the sins I have committed. Your forty-nine sons were born without any harm only because of your devotion. Being my enemy, I had cut them into pieces, but they did not die because of your supreme devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)