श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 74
 
 
श्लोक  6.18.74 
आराधनं भगवत ईहमाना निराशिष: ।
ये तु नेच्छन्त्यपि परं ते स्वार्थकुशला: स्मृता: ॥ ७४ ॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि परम पुरुषोत्तम भगवान की उपासना में रत रहने वालों को भगवान से किसी प्रकार की भौतिक इच्छा, यहाँ तक कि मोक्ष की भी इच्छा नहीं रहती, फिर भी भगवान कृष्ण उनकी सभी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं।
 
यद्यपि परम पुरुषोत्तम भगवान की उपासना में रत रहने वालों को भगवान से किसी प्रकार की भौतिक इच्छा, यहाँ तक कि मोक्ष की भी इच्छा नहीं रहती, फिर भी भगवान कृष्ण उनकी सभी इच्छाओं को पूर्ण करते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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