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श्लोक 6.18.68  |
दितिरुत्थाय ददृशे कुमाराननलप्रभान् ।
इन्द्रेण सहितान् देवी पर्यतुष्यदनिन्दिता ॥ ६८ ॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान पूर्ण पुरुषोत्तम की पूजा से दिति पूर्ण रूप से शुद्ध हो गई। जब वह बिस्तर से उठी तो उसने इन्द्र समेत उनचास पुत्रों को देखा। वे सभी अग्नि के समान तेजस्वी थे और इन्द्र से मित्रता रखते थे, इसलिए वह बहुत प्रसन्न थी। |
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| भगवान पूर्ण पुरुषोत्तम की पूजा से दिति पूर्ण रूप से शुद्ध हो गई। जब वह बिस्तर से उठी तो उसने इन्द्र समेत उनचास पुत्रों को देखा। वे सभी अग्नि के समान तेजस्वी थे और इन्द्र से मित्रता रखते थे, इसलिए वह बहुत प्रसन्न थी। |
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