श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  6.18.65 
न ममार दितेर्गर्भ: श्रीनिवासानुकम्पया ।
बहुधा कुलिशक्षुण्णो द्रौण्यस्त्रेण यथा भवान् ॥ ६५ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा, हे राजा परीक्षित! अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से आप जल गए थे, लेकिन जब श्री कृष्ण आपकी माँ के गर्भ में प्रवेश किये तो आप बच गए। ठीक उसी प्रकार, इंद्र ने एक भ्रूण को वज्र से उनचास भागों में काट दिया था, फिर भी वे सभी पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् की कृपा से बच गए।
 
शुकदेव गोस्वामी ने कहा, हे राजा परीक्षित! अश्वत्थामा के ब्रह्मास्त्र से आप जल गए थे, लेकिन जब श्री कृष्ण आपकी माँ के गर्भ में प्रवेश किये तो आप बच गए। ठीक उसी प्रकार, इंद्र ने एक भ्रूण को वज्र से उनचास भागों में काट दिया था, फिर भी वे सभी पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान् की कृपा से बच गए।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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