श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  6.18.61 
लब्ध्वा तदन्तरं शक्रो निद्रापहृतचेतस: ।
दिते: प्रविष्ट उदरं योगेशो योगमायया ॥ ६१ ॥
 
 
अनुवाद
इस त्रुटि को पाकर, समस्त योग सिद्धियाँ (जैसे अणिमा और लघिमा) धारण करने वाले इन्द्र अचेत दिति के गर्भ में प्रवेश कर गए, जो गहरी नींद में सोई हुई थी।
 
इस त्रुटि को पाकर, समस्त योग सिद्धियाँ (जैसे अणिमा और लघिमा) धारण करने वाले इन्द्र अचेत दिति के गर्भ में प्रवेश कर गए, जो गहरी नींद में सोई हुई थी।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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