श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 60
 
 
श्लोक  6.18.60 
एकदा सा तु सन्ध्यायामुच्छिष्टा व्रतकर्शिता ।
अस्पृष्टवार्यधौताङ्‌घ्रि: सुष्वाप विधिमोहिता ॥ ६० ॥
 
 
अनुवाद
कठोर तपस्या करते-करते अति क्षीण और कमजोर हो जाने के कारण एक बार दिति ने भोजन के बाद मुँह, हाथ और पैर धोना भूलकर ही सन्ध्या के समय सो गई।
 
कठोर तपस्या करते-करते अति क्षीण और कमजोर हो जाने के कारण एक बार दिति ने भोजन के बाद मुँह, हाथ और पैर धोना भूलकर ही सन्ध्या के समय सो गई।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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