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श्लोक 6.18.60  |
एकदा सा तु सन्ध्यायामुच्छिष्टा व्रतकर्शिता ।
अस्पृष्टवार्यधौताङ्घ्रि: सुष्वाप विधिमोहिता ॥ ६० ॥ |
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| अनुवाद |
| कठोर तपस्या करते-करते अति क्षीण और कमजोर हो जाने के कारण एक बार दिति ने भोजन के बाद मुँह, हाथ और पैर धोना भूलकर ही सन्ध्या के समय सो गई। |
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| कठोर तपस्या करते-करते अति क्षीण और कमजोर हो जाने के कारण एक बार दिति ने भोजन के बाद मुँह, हाथ और पैर धोना भूलकर ही सन्ध्या के समय सो गई। |
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