Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.18.58: हे राजा परीक्षित! जिस प्रकार कोई शिकारी हिरण को मारने के लिए हिरण की खाल पहनकर और हिरणों की तरह व्यवहार करके अपने आपको उनके जैसा बना लेता है, उसी तरह से इंद्र जो असल में दिति के बेटों का दुश्मन था, बाहर से उनका मित्र बनकर दिति की बहुत श्रद्धा से सेवा करने लगा। इंद्र का मकसद दिति के व्रत में कोई गलती ढूँढकर उसे धोखा देना था, लेकिन वह नहीं चाहता था कि कोई उसे पहचान ले, इसलिए वह बहुत सावधानी से उसकी सेवा कर रहा था। | bhagavat अध्याय 6.18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजा परीक्षित! जिस प्रकार कोई शिकारी हिरण को मारने के लिए हिरण की खाल पहनकर और हिरणों की तरह व्यवहार करके अपने आपको उनके जैसा बना लेता है, उसी तरह से इंद्र जो असल में दिति के बेटों का दुश्मन था, बाहर से उनका मित्र बनकर दिति की बहुत श्रद्धा से सेवा करने लगा। इंद्र का मकसद दिति के व्रत में कोई गलती ढूँढकर उसे धोखा देना था, लेकिन वह नहीं चाहता था कि कोई उसे पहचान ले, इसलिए वह बहुत सावधानी से उसकी सेवा कर रहा था।
O King Parikshit! Just as a hunter wears the skin of a deer to kill a deer and disguises himself, Indra, being the enemy of Diti's sons at heart but becoming their friend from outside, started serving Diti with utmost devotion. Indra's intention was to deceive Diti by finding faults in her fasting rituals, but at the same time he did not want anyone to recognize him, so he started serving her with utmost caution.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥