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bhagavat 6.18.55: हे राजा परीक्षित! कश्यप की पत्नी दिति ने पुंसवन नामक पवित्रता की प्रक्रिया अपनाने का वादा किया। उसने कहा, "हाँ, मैं आपके निर्देशानुसार सब कुछ करूँगी।" वह बहुत खुशी से कश्यप का वीर्य धारण करके गर्भवती हुई और श्रद्धा से व्रतों का पालन करती रही।   |   bhagavat अध्याय 6.18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत   ।   bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 55
 
 
श्लोक  6.18.55 
बाढमित्यभ्युपेत्याथ दिती राजन्महामना: ।
कश्यपाद् गर्भमाधत्त व्रतं चाञ्जो दधार सा ॥ ५५ ॥
 
 
अनुवाद
हे राजा परीक्षित! कश्यप की पत्नी दिति ने पुंसवन नामक पवित्रता की प्रक्रिया अपनाने का वादा किया। उसने कहा, "हाँ, मैं आपके निर्देशानुसार सब कुछ करूँगी।" वह बहुत खुशी से कश्यप का वीर्य धारण करके गर्भवती हुई और श्रद्धा से व्रतों का पालन करती रही।
 
O King Parikshit! Kashyap's wife Diti accepted to perform the purification ritual called Pumsavan. She said, "Yes, I will do everything as per your advice." She very happily took Kashyap's semen and became pregnant and continued to observe the fast with devotion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)