| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य » अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत » श्लोक 51 |
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| | | | श्लोक 6.18.51  | नाधौतपादाप्रयता नार्द्रपादा उदक्शिरा: ।
शयीत नापराङ्नान्यैर्न नग्ना न च सन्ध्ययो: ॥ ५१ ॥ | | | | | | अनुवाद | | तुम्हें न तो दोनों पाँव धोए बिना या शुद्ध हुए बिना, न ही गीले पाँव अथवा अपना सिर पश्चिम या उत्तर करके सोना चाहिए। सूर्योदय या सूर्यास्त के समय, निर्वस्त्र होकर या अन्य स्त्रियों के साथ नहीं लेटना चाहिए। | | | | तुम्हें न तो दोनों पाँव धोए बिना या शुद्ध हुए बिना, न ही गीले पाँव अथवा अपना सिर पश्चिम या उत्तर करके सोना चाहिए। सूर्योदय या सूर्यास्त के समय, निर्वस्त्र होकर या अन्य स्त्रियों के साथ नहीं लेटना चाहिए। | | ✨ ai-generated | | |
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