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श्लोक 6.18.50  |
नोच्छिष्टास्पृष्टसलिला सन्ध्यायां मुक्तमूर्धजा ।
अनर्चितासंयतवाक्नासंवीता बहिश्चरेत् ॥ ५० ॥ |
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| अनुवाद |
| भोजन कर लेने के बाद बिना मुँह, हाथ और पाँव धोये सड़क पर बाहर नहीं निकलो। तुम्हें न तो शाम को या बाल खुले हुए और न बिना आभूषणों के बाहर जाना चाहिए। जब तक तुम्हारी वाणी संयमित न हो और शरीर ठीक से ढका न हो, तब तक तुम्हें घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। |
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| भोजन कर लेने के बाद बिना मुँह, हाथ और पाँव धोये सड़क पर बाहर नहीं निकलो। तुम्हें न तो शाम को या बाल खुले हुए और न बिना आभूषणों के बाहर जाना चाहिए। जब तक तुम्हारी वाणी संयमित न हो और शरीर ठीक से ढका न हो, तब तक तुम्हें घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। |
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