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श्लोक 6.18.49  |
नोच्छिष्टं चण्डिकान्नं च सामिषं वृषलाहृतम् ।
भुञ्जीतोदक्यया दृष्टं पिबेन्नाञ्जलिना त्वप: ॥ ४९ ॥ |
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| अनुवाद |
| कभी भी जूठन न खायें, देवी काली (दुर्गा) को चढ़ाया हुआ प्रसाद न खायें और मांस या मछली से मिश्रित कोई भी वस्तु न खायें। किसी भी ऐसी सामग्री को न खायें जो किसी शूद्र ने लायी हो या शूद्र द्वारा छू ली गई हो अथवा रजस्वला स्त्री ने देख ली हो। पानी अंजली से पीने से बचें। |
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| कभी भी जूठन न खायें, देवी काली (दुर्गा) को चढ़ाया हुआ प्रसाद न खायें और मांस या मछली से मिश्रित कोई भी वस्तु न खायें। किसी भी ऐसी सामग्री को न खायें जो किसी शूद्र ने लायी हो या शूद्र द्वारा छू ली गई हो अथवा रजस्वला स्त्री ने देख ली हो। पानी अंजली से पीने से बचें। |
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