श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  6.18.49 
नोच्छिष्टं चण्डिकान्नं च सामिषं वृषलाहृतम् ।
भुञ्जीतोदक्यया द‍ृष्टं पिबेन्नाञ्जलिना त्वप: ॥ ४९ ॥
 
 
अनुवाद
कभी भी जूठन न खायें, देवी काली (दुर्गा) को चढ़ाया हुआ प्रसाद न खायें और मांस या मछली से मिश्रित कोई भी वस्तु न खायें। किसी भी ऐसी सामग्री को न खायें जो किसी शूद्र ने लायी हो या शूद्र द्वारा छू ली गई हो अथवा रजस्वला स्त्री ने देख ली हो। पानी अंजली से पीने से बचें।
 
Never eat stale food, do not eat prasad offered to Goddess Kali (Durga) and do not eat anything mixed with meat or fish. Do not eat anything brought by a Shudra or touched by a Shudra or seen by a menstruating woman. Do not drink water from the palm of your hand.
तात्पर्य
आमतौर पर देवी काली को मांस और मछली वाला भोजन चढ़ाया जाता है, और इसलिए कश्यप मुनि ने अपनी पत्नी को ऐसा भोजन ग्रहण करने से सख्ती से मना किया था। दरअसल वैष्णव को देवताओं को चढ़ाए गए किसी भी भोजन को ग्रहण करने की अनुमति नहीं होती है। वैष्णव केवल भगवान विष्णु को चढ़ाए गए प्रसाद को ही ग्रहण करते हैं। इन सभी निर्देशों के माध्यम से कश्यप मुनि ने अपनी पत्नी दिति को यह स्पष्ट किया कि वैष्णवी बनने के लिए किन चीजों का परित्याग करना चाहिए।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)