श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.18.36 
सोऽहं त्वयार्चितो भद्रे ईद‍ृग्भावेन भक्तित: ।
तं ते सम्पादये काममसतीनां सुदुर्लभम् ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
हे प्रिय सद्गुणी पत्नी! तूने मुझे श्रीभगवान का प्रतिनिधि मानकर अपार श्रद्धा और भक्ति से पूजा की है। अतः मैं तेरी अभिलाषाओं को पूरा करके तुझे पुरस्कृत करूँगा, जो अ-सती पत्नी के लिए असंभव है।
 
हे प्रिय सद्गुणी पत्नी! तूने मुझे श्रीभगवान का प्रतिनिधि मानकर अपार श्रद्धा और भक्ति से पूजा की है। अतः मैं तेरी अभिलाषाओं को पूरा करके तुझे पुरस्कृत करूँगा, जो अ-सती पत्नी के लिए असंभव है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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