|
| |
| |
श्लोक 6.18.31  |
एवं शुश्रूषितस्तात भगवान् कश्यप: स्त्रिया ।
प्रहस्य परमप्रीतो दितिमाहाभिनन्द्य च ॥ ३१ ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| हे मेरी प्रिय! अपनी पत्नी दिति के नम्र व्यवहार से अत्यंत प्रसन्न होकर परम शक्तिशाली संत कश्यप मुस्कुराए और उससे इस प्रकार बोले। |
| |
| हे मेरी प्रिय! अपनी पत्नी दिति के नम्र व्यवहार से अत्यंत प्रसन्न होकर परम शक्तिशाली संत कश्यप मुस्कुराए और उससे इस प्रकार बोले। |
| ✨ ai-generated |
| |
|