धातु: कुहू: सिनीवाली राका चानुमतिस्तथा ।
सायं दर्शमथ प्रात: पूर्णमासमनुक्रमात् ॥ ३ ॥
अग्नीन् पुरीष्यानाधत्त क्रियायां समनन्तर: ।
चर्षणी वरुणस्यासीद्यस्यां जातो भृगु: पुन: ॥ ४ ॥
अनुवाद
अदिति के सातवें पुत्र, धाता की चार पत्नियाँ थीं जिनके नाम कुहू, सिनीवाली, राका और अनुमति थे। इन चारों पत्नियों से क्रमश: सायम, दर्श, प्रातः और पूर्णमास नामक चार पुत्र हुए। अदिति के आठवें पुत्र, विधाता की पत्नी का नाम क्रिया था। क्रिया से विधाता के पांच पुत्र हुए, जिन्हें पुरीष्य कहा जाता था। अदिति के नौवें पुत्र, वरुण की पत्नी का नाम चर्षणी था। चर्षणी के गर्भ से ब्रह्मा के पुत्र भृगु ने फिर से जन्म लिया।
Dhata, the seventh son of Aditi, had four wives whose names were Kuhu, Siniwali, Raka and Ishma. These four had four sons named Sayam, Darsh, Pratah and Purnamas respectively. The name of the wife of Aditi's eighth son Vidhaata was Kriya from whom five sons named Purishya were born. Aditi's ninth son Varun's wife was Charshani from whose womb Brahma's son Bhrigu was born again.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥