| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य » अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत » श्लोक 3-4 |
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| | | | श्लोक 6.18.3-4  | धातु: कुहू: सिनीवाली राका चानुमतिस्तथा ।
सायं दर्शमथ प्रात: पूर्णमासमनुक्रमात् ॥ ३ ॥
अग्नीन् पुरीष्यानाधत्त क्रियायां समनन्तर: ।
चर्षणी वरुणस्यासीद्यस्यां जातो भृगु: पुन: ॥ ४ ॥ | | | | | | अनुवाद | | अदिति के सातवें पुत्र, धाता की चार पत्नियाँ थीं जिनके नाम कुहू, सिनीवाली, राका और अनुमति थे। इन चारों पत्नियों से क्रमश: सायम, दर्श, प्रातः और पूर्णमास नामक चार पुत्र हुए। अदिति के आठवें पुत्र, विधाता की पत्नी का नाम क्रिया था। क्रिया से विधाता के पांच पुत्र हुए, जिन्हें पुरीष्य कहा जाता था। अदिति के नौवें पुत्र, वरुण की पत्नी का नाम चर्षणी था। चर्षणी के गर्भ से ब्रह्मा के पुत्र भृगु ने फिर से जन्म लिया। | | | | अदिति के सातवें पुत्र, धाता की चार पत्नियाँ थीं जिनके नाम कुहू, सिनीवाली, राका और अनुमति थे। इन चारों पत्नियों से क्रमश: सायम, दर्श, प्रातः और पूर्णमास नामक चार पुत्र हुए। अदिति के आठवें पुत्र, विधाता की पत्नी का नाम क्रिया था। क्रिया से विधाता के पांच पुत्र हुए, जिन्हें पुरीष्य कहा जाता था। अदिति के नौवें पुत्र, वरुण की पत्नी का नाम चर्षणी था। चर्षणी के गर्भ से ब्रह्मा के पुत्र भृगु ने फिर से जन्म लिया। | | ✨ ai-generated | | |
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