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श्लोक 6.18.21  |
इमे श्रद्दधते ब्रह्मन्नृषयो हि मया सह ।
परिज्ञानाय भगवंस्तन्नो व्याख्यातुमर्हसि ॥ २१ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं और यहाँ उपस्थित सभी ऋषिजन इसे जानने के इच्छुक हैं। अतः हे महात्मा! हमसे इसका कारण बताएँ। |
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| हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! मैं और यहाँ उपस्थित सभी ऋषिजन इसे जानने के इच्छुक हैं। अतः हे महात्मा! हमसे इसका कारण बताएँ। |
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