श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  6.18.20 
श्रीराजोवाच
कथं त आसुरं भावमपोह्यौत्पत्तिकं गुरो ।
इन्द्रेण प्रापिता: सात्म्यं किं तत्साधु कृतं हि तै: ॥ २० ॥
 
 
अनुवाद
राजा परीक्षित ने पूछा—हे प्रभु! जन्मजात आसुरी प्रवृत्ति के होने के कारण उन उनचास मरुदगणों को इंद्र ने देवता क्यों बना दिया? क्या उन्होंने कोई पुण्य कर्म या अनुष्ठान किए थे?
 
King Parikshit asked, "O Lord! If by birth those forty-nine Maruts were full of demoniac tendencies, then why did the King of Heaven Indra make them deities? Did they perform any pious deeds or rituals?"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)