श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 18: राजा इन्द्र का वध करने के लिए दिति का व्रत  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.18.17 
बाणज्येष्ठं पुत्रशतमशनायां ततोऽभवत् ।
तस्यानुभावं सुश्लोक्यं पश्चादेवाभिधास्यते ॥ १७ ॥
 
 
अनुवाद
इसके बाद, अशना के गर्भ से महाराज बलि को सौ पुत्रों की प्राप्ति हुई, जिनमें से राजा बाण सबसे बड़े थे। बलि महाराज का चरित्र बहुत प्रशंसनीय है और उसका वर्णन आगे (आठवें स्कंध में) किया जाएगा।
 
After this, Maharaj Bali received one hundred sons from the womb of Ashna, of whom King Ban was the eldest. The character (glory) of Bali Maharaj is highly praiseworthy and his description will be given later (in the eighth chapter).
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)