Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.17.41: प्रात:काल उठकर अपने इन्द्रियों और वाणी को नियंत्रण में रखते हुए तथा श्रीभगवान् का स्मरण करके जो व्यक्ति चित्रकेतु का यह इतिहास पढ़ता है, वह बिना किसी कठिनाई के भगवान् के धाम को प्राप्त कर लेता है। | bhagavat अध्याय 6.17: माता पार्वती द्वारा चित्रकेतु को शाप । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रात:काल उठकर अपने इन्द्रियों और वाणी को नियंत्रण में रखते हुए तथा श्रीभगवान् का स्मरण करके जो व्यक्ति चित्रकेतु का यह इतिहास पढ़ता है, वह बिना किसी कठिनाई के भगवान् के धाम को प्राप्त कर लेता है।
The person who wakes up in the morning, controls his mind and speech, remembers the Lord and reads this history of Chitraketu, goes to the Lord's abode without any difficulty.
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध छह के अंतर्गत सत्रहवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥