श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 17: माता पार्वती द्वारा चित्रकेतु को शाप  »  श्लोक 4-5
 
 
श्लोक  6.17.4-5 
एकदा स विमानेन विष्णुदत्तेन भास्वता ।
गिरिशं दद‍ृशे गच्छन् परीतं सिद्धचारणै: ॥ ४ ॥
आलिङ्गय‍ाङ्कीकृतां देवीं बाहुना मुनिसंसदि ।
उवाच देव्या: श‍ृण्वन्त्या जहासोच्चैस्तदन्तिके ॥ ५ ॥
 
 
अनुवाद
एक समय की बात है, जब राजा चित्रकेतु भगवान विष्णु द्वारा दिए गए अति तेजप्रकाशवान हवाई जहाज से अंतरिक्ष में यात्रा कर रहे थे, उन्होंने भगवान शिव को देखा, जो सिद्धों और चारणों से घिरे थे। भगवान शिव महामुनियों की सभा में बैठे थे और देवी पार्वती को अपनी गोद में बैठाकर एक हाथ से आलिंगन कर रहे थे। राजा चित्रकेतु पार्वती के पास जाकर तेजी से हंसे और कहने लगे।
 
एक समय की बात है, जब राजा चित्रकेतु भगवान विष्णु द्वारा दिए गए अति तेजप्रकाशवान हवाई जहाज से अंतरिक्ष में यात्रा कर रहे थे, उन्होंने भगवान शिव को देखा, जो सिद्धों और चारणों से घिरे थे। भगवान शिव महामुनियों की सभा में बैठे थे और देवी पार्वती को अपनी गोद में बैठाकर एक हाथ से आलिंगन कर रहे थे। राजा चित्रकेतु पार्वती के पास जाकर तेजी से हंसे और कहने लगे।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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