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श्लोक 6.17.15  |
अत: पापीयसीं योनिमासुरीं याहि दुर्मते ।
यथेह भूयो महतां न कर्ता पुत्र किल्बिषम् ॥ १५ ॥ |
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| अनुवाद |
| हे प्रतापी पुत्र! अब तुम असुरों के नीच और पापी परिवार में जन्म लो जिससे तुम फिर से इस संसार में श्रेष्ठ संत पुरुषों के प्रति ऐसे पाप न कर सको। |
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| हे प्रतापी पुत्र! अब तुम असुरों के नीच और पापी परिवार में जन्म लो जिससे तुम फिर से इस संसार में श्रेष्ठ संत पुरुषों के प्रति ऐसे पाप न कर सको। |
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