श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 17: माता पार्वती द्वारा चित्रकेतु को शाप  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.17.11 
श्रीपार्वत्युवाच
अयं किमधुना लोके शास्ता दण्डधर: प्रभु: ।
अस्मद्विधानां दुष्टानां निर्लज्जानां च विप्रकृत् ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
देवी पार्वती ने कहा—अरे, क्या हम जैसे बेशरम लोगों को दण्डित करने के लिए इसने दण्डाधिकारी बनने की उपाधि प्राप्त कर ली है? क्या इसे शासक बनाया गया है? क्या यही सबका एकमात्र मालिक है?
 
Goddess Parvati said—Oh, has he taken the position of a dandadhari (a stick-bearer) to punish shameless people like us? Has he been appointed as the ruler? Is he the sole master of all?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)