जीव की एक और अजीब विशेषता यह है कि वह माया से ढक जाता है। आत्ममाया गुणैः: वह सर्वोच्च भगवान की भ्रामक ऊर्जा से ढके जाने की ओर प्रवृत्त होता है। जीव भौतिक जगत में अपने सशर्त जीवन के लिए जिम्मेदार है, और इसलिए उसे प्रभु ("स्वामी") के रूप में वर्णित किया गया है। यदि वह चाहता है तो वह इस भौतिक जगत में आ सकता है, और यदि वह चाहता है तो वह घर लौट सकता है, भगवान के पास वापस जा सकता है। क्योंकि वह इस भौतिक जगत का आनंद लेना चाहता था, सर्वोच्च भगवान ने उसे भौतिक ऊर्जा की एजेंसी द्वारा एक भौतिक शरीर दिया। जैसा कि भगवान ने स्वयं भगवद्-गीता (18.61) में कहा है:
ईश्वर: सर्व भूतां हृद देशे अर्जुन तिष्ठति
भ्रामयन सर्व भूतानि
यंत्रारुधाणि मायाया
"सर्वोच्च भगवान हर किसी के हृदय में स्थित हैं, हे अर्जुन, और सभी जीवों की भटकन का निर्देशन कर रहे हैं, जो एक यंत्र पर सवार हैं, जो भौतिक ऊर्जा से बना है।" सर्वोच्च भगवान जीव को इस भौतिक जगत में अपनी इच्छानुसार आनंद लेने का मौका देते हैं, लेकिन वह अपनी इच्छा को खुले तौर पर व्यक्त करते हैं कि जीव सभी भौतिक आकांक्षाओं को छोड़ दे, पूरी तरह से उनके प्रति समर्पण कर दे और घर लौट जाए, भगवान के पास वापस जाएं।
जीव सबसे छोटा (सूक्ष्म) होता है। जीव गोस्वामी इस संबंध में कहते हैं कि शरीर के भीतर के जीव को भौतिकवादी वैज्ञानिकों के लिए खोजना बेहद मुश्किल है, हालाँकि हम अधिकारियों से समझते हैं कि जीव शरीर के भीतर है। शरीर जीव से भिन्न है।
