Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.16.59: कर्मफल की इच्छा से किए गए कर्मों में बड़ी बाधाएँ आती हैं और इच्छानुसार फल नहीं मिलते, चाहे वे भौतिक कर्म हों या वैदिक साहित्य में वर्णित सकाम कर्मों के फल हों। बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह सकाम कर्मों की इच्छा का त्याग कर दे क्योंकि ऐसे प्रयासों से जीवन का परम लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सकता। दूसरी ओर, यदि कोई कर्मफल की इच्छा किए बिना कर्म करता है - दूसरे शब्दों में, यदि वह भक्ति-कर्मों में संलग्न होता है - तो वह दयनीय स्थितियों से मुक्त होकर जीवन का परम लक्ष्य प्राप्त कर सकता है। इस पर विचार करते हुए व्यक्ति को चाहिए कि भौतिक इच्छाओं का त्याग कर दे। | bhagavat अध्याय 6.16: राजा चित्रकेतु की परमेश्वर से भेंट । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कर्मफल की इच्छा से किए गए कर्मों में बड़ी बाधाएँ आती हैं और इच्छानुसार फल नहीं मिलते, चाहे वे भौतिक कर्म हों या वैदिक साहित्य में वर्णित सकाम कर्मों के फल हों। बुद्धिमान व्यक्ति को चाहिए कि वह सकाम कर्मों की इच्छा का त्याग कर दे क्योंकि ऐसे प्रयासों से जीवन का परम लक्ष्य प्राप्त नहीं हो सकता। दूसरी ओर, यदि कोई कर्मफल की इच्छा किए बिना कर्म करता है - दूसरे शब्दों में, यदि वह भक्ति-कर्मों में संलग्न होता है - तो वह दयनीय स्थितियों से मुक्त होकर जीवन का परम लक्ष्य प्राप्त कर सकता है। इस पर विचार करते हुए व्यक्ति को चाहिए कि भौतिक इच्छाओं का त्याग कर दे।
Remembering that in the field of action performed for the fruit of karma, there are great obstacles and results contrary to the desire are obtained, whether they arise from material actions or from the fruit of the fruit of the Vedic scriptures, a wise man should give up the desire for fruit of the karma, because the ultimate goal of life cannot be achieved by such efforts. On the other hand, if one performs action without any desire for the fruit of karma, that is, if he engages in devotional activities, then he can achieve the ultimate goal of life by remaining free from miserable conditions. Considering this, a man should give up material desires.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥