Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.16.48: हे प्रभु! आपकी इच्छा से ही भगवान ब्रह्मा, इंद्र और दृश्य जगत के अन्य अधीक्षक अपने-अपने कार्यों में लग जाते हैं। हे ईश्वर! आपके द्वारा भौतिक शक्ति को देखे जाने पर ही इंद्रियां देख पाती हैं। अनंत भगवान सारे ब्रह्मांडों को सरसों के बीजों की भांति अपने सिर पर धारण किए रहते हैं। हे सहस्त्र फनों वाले परम पुरुष! मैं आपको सादर नमस्कार करता हूँ। | bhagavat अध्याय 6.16: राजा चित्रकेतु की परमेश्वर से भेंट । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु! आपकी इच्छा से ही भगवान ब्रह्मा, इंद्र और दृश्य जगत के अन्य अधीक्षक अपने-अपने कार्यों में लग जाते हैं। हे ईश्वर! आपके द्वारा भौतिक शक्ति को देखे जाने पर ही इंद्रियां देख पाती हैं। अनंत भगवान सारे ब्रह्मांडों को सरसों के बीजों की भांति अपने सिर पर धारण किए रहते हैं। हे सहस्त्र फनों वाले परम पुरुष! मैं आपको सादर नमस्कार करता हूँ।
O Lord! It is by Your efforts that Lord Brahma, Indra and other superintendents of the cosmic manifestation are engaged in their respective activities. O Lord! It is only when You see the material energy that the senses are able to see. The infinite Lord holds all the universes on His head like mustard seeds. O thousand-hooded Supreme Being! I offer my respectful obeisances unto You.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥