Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 6.15.20: जब मैं पहले तुम्हारे घर आया था, तो मैं तुम्हें सर्वोच्च आध्यात्मिक ज्ञान दे सकता था, किंतु जब मैंने देखा कि तुम्हारा मन भौतिक चीजों में उलझा हुआ है, तो मैंने तुम्हें केवल एक पुत्र दिया, जिससे तुम्हें खुशी और दुःख दोनों मिले। | bhagavat अध्याय 6.15: नारद तथा अंगिरा ऋषियों द्वारा राजा चित्रकेतु को उपदेश । bhagavat स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तदैव ते परं ज्ञानं ददामि गृहमागत: ।
ज्ञात्वान्याभिनिवेशं ते पुत्रमेव ददाम्यहम् ॥ २० ॥
अनुवाद
जब मैं पहले तुम्हारे घर आया था, तो मैं तुम्हें सर्वोच्च आध्यात्मिक ज्ञान दे सकता था, किंतु जब मैंने देखा कि तुम्हारा मन भौतिक चीजों में उलझा हुआ है, तो मैंने तुम्हें केवल एक पुत्र दिया, जिससे तुम्हें खुशी और दुःख दोनों मिले।
When I first came to your house, I would have given you supreme divine knowledge, but when I saw that your mind was entangled in material things, I gave you only a son who became the cause of your joy and sorrow.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥