श्रीसूत उवाच
परीक्षितोऽथ सम्प्रश्नं भगवान् बादरायणि: ।
निशम्य श्रद्दधानस्य प्रतिनन्द्य वचोऽब्रवीत् ॥ ८ ॥
अनुवाद
श्री सूत गोस्वामी ने कहा—महाराज परीक्षित के इस उत्तम प्रश्न को सुनकर परम शक्तिमान ऋषि शुकदेव गोस्वामी अपने शिष्य को बड़े प्रेम से उत्तर देने लगे।
Sri Suta Goswami said—On hearing this excellent question of Maharaja Pariksit, the all-powerful sage Sukadeva Goswami began to answer his disciple very lovingly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥