श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 14: राजा चित्रकेतु का शोक  »  श्लोक 45
 
 
श्लोक  6.14.45 
शयानं सुचिरं बालमुपधार्य मनीषिणी ।
पुत्रमानय मे भद्रे इति धात्रीमचोदयत् ॥ ४५ ॥
 
 
अनुवाद
यह विचार करते हुए कि उसका बेटा एक लंबे समय से सो रहा है—उस अत्यंत बुद्धिमान रानी कृतद्युति ने धाय को आज्ञा दी, "हे प्रिय सखी, मेरे पुत्र को यहाँ ले आओ।"
 
यह विचार करते हुए कि उसका बेटा एक लंबे समय से सो रहा है—उस अत्यंत बुद्धिमान रानी कृतद्युति ने धाय को आज्ञा दी, "हे प्रिय सखी, मेरे पुत्र को यहाँ ले आओ।"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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