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श्लोक 6.14.43  |
विद्वेषनष्टमतय: स्त्रियो दारुणचेतस: ।
गरं ददु: कुमाराय दुर्मर्षा नृपतिं प्रति ॥ ४३ ॥ |
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| अनुवाद |
| द्वेष में वृद्धि होने से रानियों की समझ का लोप हो गया। अत्यधिक कठोर हृदय होने तथा राजा की उपेक्षा न सह सकने के कारण अंत में उन्होंने पुत्र को विष पिला दिया। |
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| द्वेष में वृद्धि होने से रानियों की समझ का लोप हो गया। अत्यधिक कठोर हृदय होने तथा राजा की उपेक्षा न सह सकने के कारण अंत में उन्होंने पुत्र को विष पिला दिया। |
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