श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 14: राजा चित्रकेतु का शोक  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  6.14.30 
सापि तत्प्राशनादेव चित्रकेतोरधारयत् ।
गर्भं कृतद्युतिर्देवी कृत्तिकाग्नेरिवात्मजम् ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
कृत्तिका देवी ने भगवान शिव का वीर्य अग्नि से ग्रहण करके स्कन्द [कार्तिकेय] नामक पुत्र को गर्भ में धारण किया था, ठीक उसी तरह चित्रकेतु से वीर्य प्राप्त करके कृतद्युति ने अंगिरा द्वारा सम्पन्न यज्ञ के अवशेष को खाकर गर्भ धारण किया।
 
कृत्तिका देवी ने भगवान शिव का वीर्य अग्नि से ग्रहण करके स्कन्द [कार्तिकेय] नामक पुत्र को गर्भ में धारण किया था, ठीक उसी तरह चित्रकेतु से वीर्य प्राप्त करके कृतद्युति ने अंगिरा द्वारा सम्पन्न यज्ञ के अवशेष को खाकर गर्भ धारण किया।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas