|
| |
| |
श्लोक 6.14.30  |
सापि तत्प्राशनादेव चित्रकेतोरधारयत् ।
गर्भं कृतद्युतिर्देवी कृत्तिकाग्नेरिवात्मजम् ॥ ३० ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| कृत्तिका देवी ने भगवान शिव का वीर्य अग्नि से ग्रहण करके स्कन्द [कार्तिकेय] नामक पुत्र को गर्भ में धारण किया था, ठीक उसी तरह चित्रकेतु से वीर्य प्राप्त करके कृतद्युति ने अंगिरा द्वारा सम्पन्न यज्ञ के अवशेष को खाकर गर्भ धारण किया। |
| |
| कृत्तिका देवी ने भगवान शिव का वीर्य अग्नि से ग्रहण करके स्कन्द [कार्तिकेय] नामक पुत्र को गर्भ में धारण किया था, ठीक उसी तरह चित्रकेतु से वीर्य प्राप्त करके कृतद्युति ने अंगिरा द्वारा सम्पन्न यज्ञ के अवशेष को खाकर गर्भ धारण किया। |
| ✨ ai-generated |
| |
|