श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 14: राजा चित्रकेतु का शोक  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  6.14.3 
रजोभि: समसङ्ख्याता: पार्थिवैरिह जन्तव: ।
तेषां ये केचनेहन्ते श्रेयो वै मनुजादय: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
इस भौतिक जगत में जीवों की संख्या उतनी ही है जितने कि परमाणु हैं। इन जीवों में से कुछ ही मनुष्य हैं और उनमें से कुछ ही धार्मिक सिद्धांतों का पालन करने में रुचि रखते हैं।
 
इस भौतिक जगत में जीवों की संख्या उतनी ही है जितने कि परमाणु हैं। इन जीवों में से कुछ ही मनुष्य हैं और उनमें से कुछ ही धार्मिक सिद्धांतों का पालन करने में रुचि रखते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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