| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य » अध्याय 14: राजा चित्रकेतु का शोक » श्लोक 19 |
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| | | | श्लोक 6.14.19  | अपि दारा: प्रजामात्या भृत्या: श्रेण्योऽथ मन्त्रिण: ।
पौरा जानपदा भूपा आत्मजा वशवर्तिन: ॥ १९ ॥ | | | | | | अनुवाद | | हे राजन ! क्या तुम्हारी पत्नियाँ, शहरवासी, मंत्री, महलवासी, प्रान्तपाल, पुत्र और अन्य आश्रित, और मसाले और तेल बेचने वाले व्यापारी तुम्हारे नियंत्रण में हैं? | | | | हे राजन ! क्या तुम्हारी पत्नियाँ, शहरवासी, मंत्री, महलवासी, प्रान्तपाल, पुत्र और अन्य आश्रित, और मसाले और तेल बेचने वाले व्यापारी तुम्हारे नियंत्रण में हैं? | | ✨ ai-generated | | |
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