श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 14: राजा चित्रकेतु का शोक  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  6.14.10 
आसीद्राजा सार्वभौम: शूरसेनेषु वै नृप ।
चित्रकेतुरिति ख्यातो यस्यासीत्कामधुङ्‍मही ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
हे राजा परीक्षित, शूरसेन प्रदेश में चित्रकेतु नाम का एक ऐसा राजा था, जिसका राज्य पूरे पृथ्वी पर फैला हुआ था। उसके राज्य में पृथ्वी जीवन की सभी आवश्यकताओं को पूरी करती थी।
 
हे राजा परीक्षित, शूरसेन प्रदेश में चित्रकेतु नाम का एक ऐसा राजा था, जिसका राज्य पूरे पृथ्वी पर फैला हुआ था। उसके राज्य में पृथ्वी जीवन की सभी आवश्यकताओं को पूरी करती थी।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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