श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 13: ब्रह्महत्या से पीडि़त राजा इन्द्र  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  6.13.12-13 
तां ददर्शानुधावन्तीं चाण्डालीमिव रूपिणीम् ।
जरया वेपमानाङ्गीं यक्ष्मग्रस्तामसृक्पटाम् ॥ १२ ॥
विकीर्य पलितान् केशांस्तिष्ठ तिष्ठेति भाषिणीम् ।
मीनगन्ध्यसुगन्धेन कुर्वतीं मार्गदूषणम् ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र ने देखा कि एक शापित स्त्री जो उसे एक राक्षसी के समान लग रही थी, उसका पीछा कर रही थी। वह बहुत बूढ़ी दिख रही थी और उसके शरीर का प्रत्येक अंग कांप रहा था। यक्ष्मा रोग से पीड़ित होने के कारण उसका शरीर और वस्त्र खून से सने हुए थे। उसकी सांसों से दुर्गंध आ रही थी जिससे सारा रास्ता दूषित हो रहा था। उसने इन्द्र को पुकारा, "रुको! रुको!"
 
Indra saw the result of the killing of a brahma appear in the form of a chandala woman chasing him. She appeared very old and all parts of her body were trembling. Her whole body and clothes were soaked in blood as she was suffering from tuberculosis. Her breath was emitting an intolerable smell of fish which was polluting the entire path. She called out to Indra, “Wait! Wait!”
तात्पर्य
जब किसी व्यक्ति को क्षय रोग हो जाता है, तो वह अक्सर खून की उल्टी करता है, जिससे उसके कपड़े खून से लथपथ हो जाते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)