श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 6: मनुष्य के लिए विहित कार्य  »  अध्याय 11: वृत्रासुर के दिव्य गुण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.11.9 
विलोक्य तं वज्रधरोऽत्यमर्षित:
स्वशत्रवेऽभिद्रवते महागदाम् ।
चिक्षेप तामापततीं सुदु:सहां
जग्राह वामेन करेण लीलया ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
वृत्रासुर के कृत्यों को देखकर स्वर्ग के राजा इन्द्र अधीर हो उठे और उस पर अपनी एक गदा फेंकी, जिसे रोकना अत्यंत कठिन था। फिर भी, जैसे ही वह गदा उसके पास पहुँची, वृत्रासुर ने उसे अपने बाएँ हाथ से आसानी से पकड़ लिया।
 
वृत्रासुर के कृत्यों को देखकर स्वर्ग के राजा इन्द्र अधीर हो उठे और उस पर अपनी एक गदा फेंकी, जिसे रोकना अत्यंत कठिन था। फिर भी, जैसे ही वह गदा उसके पास पहुँची, वृत्रासुर ने उसे अपने बाएँ हाथ से आसानी से पकड़ लिया।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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