श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 3: राजा नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ से ऋषभदेव का जन्म  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  5.3.18 
तत आग्नीध्रीयेंऽशकलयावतरिष्याम्यात्मतुल्यमनुपलभमान: ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
जबसे मैंने स्वयं के समान कोई नहीं पाया, मैं स्वयं ही आग्नीध्र के पुत्र महाराज नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ में अवतार लूँगा।
 
जबसे मैंने स्वयं के समान कोई नहीं पाया, मैं स्वयं ही आग्नीध्र के पुत्र महाराज नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ में अवतार लूँगा।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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