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श्लोक 5.3.18  |
| तत आग्नीध्रीयेंऽशकलयावतरिष्याम्यात्मतुल्यमनुपलभमान: ॥ १८ ॥ |
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| अनुवाद |
| जबसे मैंने स्वयं के समान कोई नहीं पाया, मैं स्वयं ही आग्नीध्र के पुत्र महाराज नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ में अवतार लूँगा। |
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| जबसे मैंने स्वयं के समान कोई नहीं पाया, मैं स्वयं ही आग्नीध्र के पुत्र महाराज नाभि की पत्नी मेरुदेवी के गर्भ में अवतार लूँगा। |
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