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bhagavat 5.25.7: शुकदेव गोस्वामी ने कहा-देवता, असुर, उरग (सर्पदेव), सिद्ध, गंधर्व, विद्याधर और अनेक उच्च संत लगातार भगवान की प्रार्थना करते रहते हैं। मद के कारण भगवान विह्वल दिखते हैं और उनकी आंखें खिले हुए फूलों की तरह इधर-उधर घूमती हैं। वे अपने मुंह से निकली मीठी वाणी से अपने करीबी लोगों और देवताओं के नेताओं को खुश करते हैं। नीले वस्त्र पहने और एक कान में कुंडल धारण किए हुए, वे अपनी पीठ पर हल को अपने दो सुंदर और मजबूत हाथों से पकड़े हुए हैं। वे इंद्र की तरह सफेद दिखते हैं, वे अपनी कमर में सोने की मेखला और गले में हमेशा ताज़े तुलसी के फूलों की वैजयन्तीमाला पहने हुए हैं। तुलसी के फूलों की शहद जैसी खुशबू से आकर्षित होकर मधुमक्खियां माला के चारों ओर मंडराती रहती हैं, जिससे माला और भी सुंदर लगती है। इस तरह, भगवान अपने उदार स्वभाव वाले मनोरंजक कार्यों का आनंद लेते हैं।   |   bhagavat अध्याय 5.25: भगवान् अनन्त की महिमा   ।   bhagavat स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 25: भगवान् अनन्त की महिमा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  5.25.7 
ध्यायमान: सुरासुरोरगसिद्धगन्धर्वविद्याधरमुनिगणैरनवरतमदमुदितविकृतविह्वललोचन: सुललितमुखरिकामृतेनाप्यायमान: स्वपार्षदविबुधयूथपतीनपरिम्‍लानरागनवतुलसिकामोदमध्वासवेन माद्यन्मधुकरव्रातमधुरगीतश्रियं वैजयन्तीं स्वां वनमालां नीलवासा एककुण्डलो हलककुदि कृतसुभगसुन्दरभुजो भगवान्महेन्द्रो वारणेन्द्र इव काञ्चनीं कक्षामुदारलीलो बिभर्ति ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा-देवता, असुर, उरग (सर्पदेव), सिद्ध, गंधर्व, विद्याधर और अनेक उच्च संत लगातार भगवान की प्रार्थना करते रहते हैं। मद के कारण भगवान विह्वल दिखते हैं और उनकी आंखें खिले हुए फूलों की तरह इधर-उधर घूमती हैं। वे अपने मुंह से निकली मीठी वाणी से अपने करीबी लोगों और देवताओं के नेताओं को खुश करते हैं। नीले वस्त्र पहने और एक कान में कुंडल धारण किए हुए, वे अपनी पीठ पर हल को अपने दो सुंदर और मजबूत हाथों से पकड़े हुए हैं। वे इंद्र की तरह सफेद दिखते हैं, वे अपनी कमर में सोने की मेखला और गले में हमेशा ताज़े तुलसी के फूलों की वैजयन्तीमाला पहने हुए हैं। तुलसी के फूलों की शहद जैसी खुशबू से आकर्षित होकर मधुमक्खियां माला के चारों ओर मंडराती रहती हैं, जिससे माला और भी सुंदर लगती है। इस तरह, भगवान अपने उदार स्वभाव वाले मनोरंजक कार्यों का आनंद लेते हैं।
 
Sukadeva Goswami further said—The gods, demons, serpent gods, Siddhas, Gandharvas, Vidyadharas and many siddha saints keep praying to the Lord continuously. The Lord appears agitated due to intoxication and His eyes move here and there like fully bloomed flowers. He pleases His courtiers, the chiefs of the gods with the sweet words that come out of His mouth. Wearing blue clothes and an earring in the ear, He is holding the plough on His back with His two nimble hands. He looks white like Indra, He wears a golden belt around His waist and a Vaijayanti garland of ever fresh Tulsi leaves around His neck. Attracted by the honey-like smell of Tulsi leaves, the bees keep hovering around the garland, which makes the garland look even more beautiful. In this way the Lord remains engaged in divine pastimes.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)