लक्षोत्तरं सार्धनवकोटियोजनपरिमण्डलं भूवलयस्य क्षणेन सगव्यूत्युत्तरं द्विसहस्रयोजनानि स भुङ्क्ते ॥ १९ ॥
अनुवाद
हे राजन, अपनी कक्षा में भूमंडलीय यात्रा के दौरान सूर्यदेव एक क्षण में दो हजार योजन तथा दो कोस (१६,००४ मील) की गति से ९,५१,००,००० योजन (७६,०८८०,००० मील) की दूरी तय कर लेता है।
O King, while revolving around the Earth, the Sun God covers a distance of 9,51,00,000 Yojanas (76,0880,000 miles) in a moment at the speed of two thousand Yojanas and two Kos (16,004 miles).
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध पांच के अंतर्गत इक्कीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥