श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 20: ब्रह्माण्ड रचना का विश्लेषण  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  5.20.25 
तस्यापि प्रैयव्रत एवाधिपतिर्नाम्ना मेधातिथि: सोऽपि विभज्य सप्त वर्षाणि पुत्रनामानि तेषु स्वात्मजान् पुरोजवमनोजवपवमानधूम्रानीकचित्ररेफबहुरूपविश्वधारसंज्ञान्निधाप्याधिपतीन् स्वयं भगवत्यनन्त आवेशितमतिस्तपोवनं प्रविवेश ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
इस द्वीप के स्वामी, प्रियव्रत के पुत्र मेधातिथि ने द्वीप को सात भागों में बाँटकर अपने पुत्रों के नाम पर उनका विभाजन किया और उन्हें उन द्वीपों का राजा बना दिया। उनके इन पुत्रों के नाम थे- पुरोजव, मनोजव, पवमान, धूम्रानीक, चित्ररेफ, बहुरूप और विश्वधार। द्वीप को विभाजित करके अपने पुत्रों को राजा बनाकर मेधातिथि विरक्त हो गये और उन्होंने श्रीभगवान के चरण कमलों में अपना मन लगाने के लिए एक ध्यान योग्य तपोवन में प्रवेश किया।
 
Medhatithi was the son of Priyavrata, the owner of this island. He too divided his island into seven parts and named them after his sons and made them kings of those islands. The names of his sons are- Purojav, Manojav, Pavaman, Dhoomraneek, Chitraref, Bahuroop and Vishvadhar. After dividing this island and making his sons their kings, Medhapati himself became detached and entered a grove suitable for meditation with the aim of focusing his mind on the feet of Shri Bhagwan.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)