श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 20: ब्रह्माण्ड रचना का विश्लेषण  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  5.20.15 
तेषां वर्षेषु सीमागिरयो नद्यश्चाभिज्ञाता: सप्त सप्तैव चक्रश्चतु:श‍ृङ्ग: कपिलश्चित्रकूटो देवानीक ऊर्ध्वरोमा द्रविण इति रसकुल्या मधुकुल्या मित्रविन्दा श्रुतविन्दा देवगर्भा घृतच्युता मन्त्रमालेति ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
उन सातों द्वीपों में सात सीमांत पर्वत हैं, जो चक्र, चतु:शृंग, कपिल, चित्रकूट, देवानीक, ऊर्ध्वरोमा और द्रविण नाम से जाने जाते हैं। इसी प्रकार सात नदियाँ हैं जिनके नाम रमकुल्या, मधुकुल्या, मित्रविन्दा, श्रुतविन्दा, देवगर्भा, घृतच्युता और मंत्रमाला हैं।
 
There are seven marginal mountains in these seven islands, whose names are Chakra, Chatushringa, Kapil, Chitrakoot, Devanik, Urdhvaroma and Dravina. Similarly, there are seven rivers whose names are Ramkulya, Madhukulya, Mitravinda, Shrutavinda, Devgarbha, Ghritchyuta and Mantramala.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)