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श्लोक 5.18.2  |
भद्रश्रवस ऊचु:
ॐ नमो भगवते धर्मायात्मविशोधनाय नम इति ॥ २ ॥ |
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| अनुवाद |
| राजा भद्रश्रवा और उनके अंतरंग सहयोगी इस प्रकार नमस्कार करते हैं- इस भौतिक जगत में कर्मबद्ध आत्मा के चित्त को शुद्ध करने वाले, सभी धार्मिक नियमों के भंडार भगवान् को हमारा नमन। हम बार-बार उन्हें विनम्रतापूर्वक नमन करते हैं। |
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| राजा भद्रश्रवा और उनके अंतरंग सहयोगी इस प्रकार नमस्कार करते हैं- इस भौतिक जगत में कर्मबद्ध आत्मा के चित्त को शुद्ध करने वाले, सभी धार्मिक नियमों के भंडार भगवान् को हमारा नमन। हम बार-बार उन्हें विनम्रतापूर्वक नमन करते हैं। |
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