श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 5: सृष्टि की प्रेरणा  »  अध्याय 17: गंगा-अवतरण  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.17.10 
अन्ये च नदा नद्यश्च वर्षे वर्षे सन्ति बहुशो मेर्वादिगिरिदुहितर: शतश: ॥ १० ॥
 
 
अनुवाद
मेरु पर्वत के शिखर से अनेक छोटी-बड़ी नदियाँ बहती हैं। वे पर्वत की पुत्रियों के समान हैं और सैकड़ों धाराओं में विभिन्न प्रान्तों में बहती हैं।
 
मेरु पर्वत के शिखर से अनेक छोटी-बड़ी नदियाँ बहती हैं। वे पर्वत की पुत्रियों के समान हैं और सैकड़ों धाराओं में विभिन्न प्रान्तों में बहती हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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