Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 4.9.55: हर द्वार पर जलते हुए दीपक और रंग-बिरंगे कपड़े, मोतियों की माला, फूलों की माला और लटकती हुई आम की पत्तियों से सजे हुए बड़े-बड़े पानी के बर्तन रखे हुए थे। | bhagavat अध्याय 4.9: ध्रुव महाराज का घर लौटना । bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हर द्वार पर जलते हुए दीपक और रंग-बिरंगे कपड़े, मोतियों की माला, फूलों की माला और लटकती हुई आम की पत्तियों से सजे हुए बड़े-बड़े पानी के बर्तन रखे हुए थे।
At every door there were burning lamps and large water pots decorated with various kinds of colourful clothes, pearl strings, garlands and hanging mango leaves.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥