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bhagavat 4.9.48: उत्तम और ध्रुव महाराज दोनों भाईयों ने एक-दूसरे के साथ आँसू साझा किए। वे प्यार और स्नेह के एहसास से भर उठे और जब उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया, तो उनके रोम खड़े हो गए।   |   bhagavat अध्याय 4.9: ध्रुव महाराज का घर लौटना   ।   bhagavat स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 9: ध्रुव महाराज का घर लौटना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  4.9.48 
उत्तमश्च ध्रुवश्चोभावन्योन्यं प्रेमविह्वलौ ।
अङ्गसङ्गादुत्पुलकावस्रौघं मुहुरूहतु: ॥ ४८ ॥
 
 
अनुवाद
उत्तम और ध्रुव महाराज दोनों भाईयों ने एक-दूसरे के साथ आँसू साझा किए। वे प्यार और स्नेह के एहसास से भर उठे और जब उन्होंने एक-दूसरे को गले लगाया, तो उनके रोम खड़े हो गए।
 
The two brothers, Uttam and Dhruva Maharaja, exchanged tears. They were overwhelmed with the feeling of affection and when they embraced each other, they were thrilled.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)