|
| |
| |
श्लोक 4.28.50  |
चितिं दारुमयीं चित्वा तस्यां पत्यु: कलेवरम् ।
आदीप्य चानुमरणे विलपन्ती मनो दधे ॥ ५० ॥ |
| |
| |
| अनुवाद |
| तब उसने लकडिय़ो से चिता बनाकर और अग्नि लगाकर उसमें अपने पति के शव को रख दिया। इस सबके बाद वह दारूण विलाप करने लगी और अपने पति के साथ अग्नि में भस्म होने के लिए स्वयं भी तैयार हो गयी। |
| |
| तब उसने लकडिय़ो से चिता बनाकर और अग्नि लगाकर उसमें अपने पति के शव को रख दिया। इस सबके बाद वह दारूण विलाप करने लगी और अपने पति के साथ अग्नि में भस्म होने के लिए स्वयं भी तैयार हो गयी। |
| ✨ ai-generated |
| |
|