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श्लोक 4.28.49  |
एवं विलपन्ती बाला विपिनेऽनुगता पतिम् ।
पतिता पादयोर्भर्तू रुदत्यश्रूण्यवर्तयत् ॥ ४९ ॥ |
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| अनुवाद |
| अपने पति की मृत्यु पर उस आज्ञाकारी पत्नी ने अपने पति के चरणों में सर रख दिया और उस एकान्त वन में जोर-जोर से रोने लगी। उसकी आँखों से निरंतर अश्रुधारा बह रही थी। |
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| अपने पति की मृत्यु पर उस आज्ञाकारी पत्नी ने अपने पति के चरणों में सर रख दिया और उस एकान्त वन में जोर-जोर से रोने लगी। उसकी आँखों से निरंतर अश्रुधारा बह रही थी। |
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