श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 4: चतुर्थ आश्रम की उत्पत्ति  »  अध्याय 28: अगले जन्म में पुरञ्जन को स्त्री-योनि की प्राप्ति  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  4.28.40 
स व्यापकतयात्मानं व्यतिरिक्ततयात्मनि ।
विद्वान् स्वप्न इवामर्शसाक्षिणं विरराम ह ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
आत्मा और परमात्मा में भेद करके राजा मलयध्वज ने पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लिया। आत्मा एक स्थान पर सीमित रहती है, जबकि परमात्मा सर्वव्यापी है। उन्हें यह ज्ञान भी हो गया कि भौतिक शरीर आत्मा नहीं है, बल्कि आत्मा भौतिक शरीर की साक्षी है।
 
आत्मा और परमात्मा में भेद करके राजा मलयध्वज ने पूर्ण ज्ञान प्राप्त कर लिया। आत्मा एक स्थान पर सीमित रहती है, जबकि परमात्मा सर्वव्यापी है। उन्हें यह ज्ञान भी हो गया कि भौतिक शरीर आत्मा नहीं है, बल्कि आत्मा भौतिक शरीर की साक्षी है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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