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श्लोक 4.28.39  |
आस्ते स्थाणुरिवैकत्र दिव्यं वर्षशतं स्थिर: ।
वासुदेवे भगवति नान्यद्वेदोद्वहन् रतिम् ॥ ३९ ॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार देवों के हिसाब से वे सौ साल तक एक ही स्थान पर अडिग रहे। इसके बाद उन्हें भगवान कृष्ण के प्रति भक्तिमयी आसक्ति हो गई और वे उसी स्थिति में स्थिर हो गए। |
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| इस प्रकार देवों के हिसाब से वे सौ साल तक एक ही स्थान पर अडिग रहे। इसके बाद उन्हें भगवान कृष्ण के प्रति भक्तिमयी आसक्ति हो गई और वे उसी स्थिति में स्थिर हो गए। |
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