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श्लोक 4.28.3  |
कालकन्यापि बुभुजे पुरञ्जनपुरं बलात् ।
ययाभिभूत: पुरुष: सद्यो नि:सारतामियात् ॥ ३ ॥ |
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| अनुवाद |
| कालकन्या ने खतरनाक सैनिकों की सहायता से धीरे-धीरे पुरञ्जन की नगरी के समस्त निवासियों पर हमला करके उन्हें बेकार कर दिया। |
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| कालकन्या ने खतरनाक सैनिकों की सहायता से धीरे-धीरे पुरञ्जन की नगरी के समस्त निवासियों पर हमला करके उन्हें बेकार कर दिया। |
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