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श्लोक 4.28.23  |
पशुवद्यवनैरेष नीयमान: स्वकं क्षयम् ।
अन्वद्रवन्ननुपथा: शोचन्तो भृशमातुरा: ॥ २३ ॥ |
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| अनुवाद |
| जब यवन लोग राजा पुरञ्जन को पशु के समान बाँधकर उनके स्थान ले जाने लगे तो राजा के अनुयायी अत्यंत शोकाकुल हो गए। विलाप करते हुए उन्हें भी राजा के साथ जाना पड़ा। |
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| जब यवन लोग राजा पुरञ्जन को पशु के समान बाँधकर उनके स्थान ले जाने लगे तो राजा के अनुयायी अत्यंत शोकाकुल हो गए। विलाप करते हुए उन्हें भी राजा के साथ जाना पड़ा। |
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